जिन्दगी को हर जगह
ढूंडता रहा हू मै
हर पल यही मौत से
केह्ता रहा हू मै
वो कही मिल जाये तो
आउंगा हसते-हसते
यही बात अपनी मझार से
केहता रहा हू मै....
जिन्दगी को हर जगह ...
हसना मेरी फितरत
रोना मेरा नसीब
हस हस कर अपने नसीब को
सेह्ता रहा हू मै....
जिन्दगी को हर जगह ...
पीने की नथी यू आदत मूझको
एक दीन बस यूही पीली
उसी बात की अफ़सोसपे अबतक
पी रहा हू मै....
जिन्दगी को हर जगह ...
बीना मुर्झाये मूद्दतो
कैसे रहे "यकीन"
यही बात कांटोसे
पूंछता रहा हू मै...
जिन्दगी को हर जगह ...
1 comment:
आज के नवकवीयों में जीवन के बारे में इस तरह से लिखनेवाले बहुत कम है और आप उनमे शामील है. जिवन के बारे मे ना ही आस्था है और ना ही कटुता. यह आपकी विशेषता हमे विशेष रूप से भा गई.
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