एक पेड पर कई है पंछी
क्या मौसम आये मौसम जाये
डर है कैसा भुला दे हसी
वो मौसम आये मौसम जाये
छोड छाड सब काम काज वो
बैठा रहता कशमकश में
कौन जाने किस बखत ये
मौसम आये मौसम जाये
होना उसना अनहोनी से
गुजर गया लौटा ना कभी
कैसे कैसे मंजर सोचे
ना मौसम आये मौसम जाये
सारी सारी रात जागी
फिर सुबह कि आस लिये
किस की कैसी रातें गुजरी
क्युं मौसम आये मौसम जाये
समय समय पर याद आये
तेरा जाना खोना युही
फिर वही है यादे अपनी
युं मौसम आये मौसम जाये
क्या मौसम आये मौसम जाये
डर है कैसा भुला दे हसी
वो मौसम आये मौसम जाये
छोड छाड सब काम काज वो
बैठा रहता कशमकश में
कौन जाने किस बखत ये
मौसम आये मौसम जाये
होना उसना अनहोनी से
गुजर गया लौटा ना कभी
कैसे कैसे मंजर सोचे
ना मौसम आये मौसम जाये
सारी सारी रात जागी
फिर सुबह कि आस लिये
किस की कैसी रातें गुजरी
क्युं मौसम आये मौसम जाये
समय समय पर याद आये
तेरा जाना खोना युही
फिर वही है यादे अपनी
युं मौसम आये मौसम जाये
1 comment:
BAHUT KHOOB
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