Saturday, May 16, 2015

सोये है..!

मशवरा हक़ीम से लेकर सोये है,
बरसो बाद ग़म ए हबीब के सोये है..!
रात गुजर जाये तो जगा देना ऐ सुबह,
नाबिना इश्क से बेखबर होकर सोये है...!
न जाने क्या जताना चाहते है,
जो उस तरफ मुड के सोयेहै...!
तुम्हारे जागने की वज़ह तुम जानो,
दुनियावाले बेखबर होकर सोये है..!

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