शाम को आँँगन में एक बात हुई
आज बचपन से मुलाक़ात हुई
आज बचपन से मुलाक़ात हुई
फुल खिले घर में बागान हुआ
कलियों की आँँगन मेंं बारात हुई
लाख निहारो तुम आसमान को मगर
जब उसने चाहा तब ही बरसात हुई
जब मन चाहे के सहर ही ना हो
फिर ना दोबारा कोई वैसी रात हुई
इस रिश्ते पर टिकी है जिन्दगी मेरी
मुक्कमल हर अपनी मुलाक़ात हुई
कलियों की आँँगन मेंं बारात हुई
लाख निहारो तुम आसमान को मगर
जब उसने चाहा तब ही बरसात हुई
जब मन चाहे के सहर ही ना हो
फिर ना दोबारा कोई वैसी रात हुई
इस रिश्ते पर टिकी है जिन्दगी मेरी
मुक्कमल हर अपनी मुलाक़ात हुई
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