Wednesday, November 21, 2018

जब मन चाहे

शाम को आँँगन में एक बात हुई
आज बचपन से मुलाक़ात हुई

फुल खिले घर में बागान हुआ
कलियों की आँँगन मेंं बारात हुई

लाख निहारो तुम आसमान को मगर
जब उसने चाहा तब ही बरसात हुई

जब मन चाहे के सहर ही ना हो
फिर ना दोबारा कोई वैसी रात हुई

इस रिश्ते पर टिकी है जिन्दगी मेरी
मुक्कमल हर अपनी मुलाक़ात हुई

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