तेवर अपने पास ही रखों जरा तुम
जिन्दगी का सुवाद भी चखो जरा तुम
जिन्दगी का सुवाद भी चखो जरा तुम
लाएंगे तूफान से साहिल पे कश्तियाँँ
हम पर भी ऐतबार ये रखो जरा तुम
जो हो गई है आस-पास गर कम रौशनी
दिल-ए-चराग अपने साथ रखो जरा तुम
मेरे सनम मेरे नसीब मेरे हबीब हो अगर
तो हौसला भी बेशुमार रखो जरा तुम
धडकने नहींं रही दिल भी नहींं रहा
सीने पे मेरे हाथ तो रखो जरा तुम
रहो अगर चाहना नशे मेंं रात दिन
जिन्दगी भी साथ-साथ रखो जरा तुम
कली का भी फुल हो जाएगा एक दिन
भंवरा भी अपने बागान में रखो जरा तुम
हम पर भी ऐतबार ये रखो जरा तुम
जो हो गई है आस-पास गर कम रौशनी
दिल-ए-चराग अपने साथ रखो जरा तुम
मेरे सनम मेरे नसीब मेरे हबीब हो अगर
तो हौसला भी बेशुमार रखो जरा तुम
धडकने नहींं रही दिल भी नहींं रहा
सीने पे मेरे हाथ तो रखो जरा तुम
रहो अगर चाहना नशे मेंं रात दिन
जिन्दगी भी साथ-साथ रखो जरा तुम
कली का भी फुल हो जाएगा एक दिन
भंवरा भी अपने बागान में रखो जरा तुम
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BOHAT KHUB
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