Wednesday, November 21, 2018

तरह-तरह के लोग

तरह-तरह के लोग है भैया तरह-तरह के लोग
कोई खाये चोरी का तो कोई लगाए भोग
भैया तरह-तरह के लोग

जन-जन में डर की बाते यूं फैलाई जाती हैंं
समझ ना आये कहाँँसे ऐसी अफवाये आती हैंं
कोई कहे मंदीर बनेगा, कोई बंद करेगा नोट
भैया तरह-तरह के लोग

सारी बाते भूल गये तो याद दिलाई जाएगी
दुश्मनी की दास्तां बेबाक सुनाई जाएगी
फिर भी अगर रहे जिन्दा तो नसीब कहो या योग
भैया तरह-तरह के लोग

कितने सारे लोग यहा हैंं इन्सान कही खो गया
जो कुछ तुमने चाहा था अब वैसा ही हो गया
जब चुनाव ही तुम जीत गए तो क्या करे आयोग
भैया तरह-तरह के लोग

देखो हिन्दोस्तान की एक ऐसी अजब कहानी थी
राजा रंक हिन्दू मुस्लिम सबको मुह ज़बानी थी
धर्म से बढकर सत्ता हो गई ऐसा लग गया रोग
भैया तरह-तरह के लोग

सारे हो गये धनी यहाँँ पर सुख का कोई पता नही
जिस के पीछे भागे हर पल वो तो कभी मिला नही
दिल को बहलाने के लिए इसे कह दिया संजोग
भैया तरह-तरह के लोग

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