मुअय्यन है मुलाक़ात तो होगी ज़रूर
तेरे भी दिल में आस ये रहेगी ज़रूर
गुज़रे है कूचे से तेरे हम बार-बार
नक़्शे पा निशानियाँँ होगी ज़रूर
हम नहीं, ना सही क्यूँँ रंजिशे बेजा
महफ़ील में तेरी बरतरी होगी ज़रूर
मजाज़ लग रहा है दुनिया में होना यूँँ
उसको भी तो बेचैनियाँँ होगी ज़रूर
जो कह रहे बात तो सुन भी लो फ़कीर
तुम को भी चाह-ए-रस्म होगी ज़रूर
तेरे भी दिल में आस ये रहेगी ज़रूर
गुज़रे है कूचे से तेरे हम बार-बार
नक़्शे पा निशानियाँँ होगी ज़रूर
हम नहीं, ना सही क्यूँँ रंजिशे बेजा
महफ़ील में तेरी बरतरी होगी ज़रूर
मजाज़ लग रहा है दुनिया में होना यूँँ
उसको भी तो बेचैनियाँँ होगी ज़रूर
जो कह रहे बात तो सुन भी लो फ़कीर
तुम को भी चाह-ए-रस्म होगी ज़रूर
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