कैसा दौर-ए-ख़ैरियत चलने लगा है ज़माने में
घर किसी और का जलने लगा है ज़माने में
घर किसी और का जलने लगा है ज़माने में
अच्छा हुआ जो इस बार बच निकले सनम
ग़म किसी और को मिलने लगा है ज़माने में
ज़मीर, मक़ान, मुल्क और ख्व़ाबो-ख्व़ाहिशे
देखो क्या-क्या खुले आम बिकने लगा है ज़माने में
जो सच्चा था, नीड़र था सिधी बात रखता था
वो आईना मजबूरन बिख़रने लगा है ज़माने में
एक दौर था जब भाईचारा इस मुल्क की शोहरत थी
इस दौर को क्या हुआ जो रूकने लगा है ज़माने में
नसीब़ तो निखरेगा एक दिन, तेरा क्या मेरा क्या
तू क्यों बीच राह यूँँ रूकने लगा है ज़माने में
आओ अब के किसी और जहाँँ में ले चलो हमें
क्या करे, अब ये दिल मचलने लगा है ज़माने में
ग़म किसी और को मिलने लगा है ज़माने में
ज़मीर, मक़ान, मुल्क और ख्व़ाबो-ख्व़ाहिशे
देखो क्या-क्या खुले आम बिकने लगा है ज़माने में
जो सच्चा था, नीड़र था सिधी बात रखता था
वो आईना मजबूरन बिख़रने लगा है ज़माने में
एक दौर था जब भाईचारा इस मुल्क की शोहरत थी
इस दौर को क्या हुआ जो रूकने लगा है ज़माने में
नसीब़ तो निखरेगा एक दिन, तेरा क्या मेरा क्या
तू क्यों बीच राह यूँँ रूकने लगा है ज़माने में
आओ अब के किसी और जहाँँ में ले चलो हमें
क्या करे, अब ये दिल मचलने लगा है ज़माने में
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