Wednesday, November 21, 2018

होना था वो ना हुआ

माहताब बने फिरते है, आफताब मेरी इस दुनिया में
हम भी तो बदलते रहते है किरदार गजब के दुनिया में

खेल-खेल में सिख लिए है रस्मो रीवाज मोहब्बत के
खेल कोई ऐसा ना बना जो वफ़ा सिखाए दुनिया में

मेरी अपनी ख्वाहिश थी के तेरा असली रूप दिखे
मंदिर, मस्जिद गिरिजाघर के चक्कर काटे दुनिया में

होना था वो ना हुआ जो ना होना था हो गया
एक ही बात बार बार दोहराते है सब दुनिया में

तेरा मेरा झगडा तो बस एक छोटी सी बात का था
कैसी-कैसी बातों पर देखो लोग झगडते है दुनिया में

ये करलू तो मन भर जाए, वो हो तो जीवन हो सफल
कितनी सारी ख्वाहिशों मेंं जान फसींं है दुनिया में

तुम आए हो खैर मनाओ, हम आए तो बात है क्या
कैसे कैसै अजब गजब के लोग पडे है दुनिया में

मेरे भीतर तेरे भीतर ना प्यार है ना नफरत है
सब दुनिया की बाते है जो हमने सीखी दुनिया में

भला-भला तो सब चाहे, चाहे कभी ना सबका भला
भले-बुरे की तरकीबें भी खूब मिली है दुनिया में

बुध्द ना समझे, कृष्ण ना समझे ना जाने महावीर को
ऐसे वैसे लोग तपस्वी बने फिरते है दुनिया में

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