घर में रहो या बाहर, तुम्हारी मर्ज़ी
मौत चुनों या जीवन, तुम्हारी मर्ज़ी।
हर बात का मतलब उल्टा निकालो,
सीधी बात ना समझो कभी, तुम्हारी मर्ज़ी ।
घर में तुम्हारे और भी है चाहनेवाले,
उनके बारे में भी सोचो, तुम्हारी मर्ज़ी ।
पूर्ण विराम से बेहतर हैं अल्प विराम,
जो भी करना उचित समझो, तुम्हारी मर्ज़ी।
जीवन क्षणिक, करना क्या है काया का?
पर ऐसी मौत मरना चाहो, तुम्हारी मर्ज़ी ।
मौत चुनों या जीवन, तुम्हारी मर्ज़ी।
हर बात का मतलब उल्टा निकालो,
सीधी बात ना समझो कभी, तुम्हारी मर्ज़ी ।
घर में तुम्हारे और भी है चाहनेवाले,
उनके बारे में भी सोचो, तुम्हारी मर्ज़ी ।
पूर्ण विराम से बेहतर हैं अल्प विराम,
जो भी करना उचित समझो, तुम्हारी मर्ज़ी।
जीवन क्षणिक, करना क्या है काया का?
पर ऐसी मौत मरना चाहो, तुम्हारी मर्ज़ी ।
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