Friday, May 1, 2020

प्रमाण

विरूद्ध ही प्रमाण है समानता का,
इसी से लेता हैं जन्म विरोधाभास,
यहीं हैं ज्ञान और अज्ञान के बीच का अहंकार,
इसी में है अंधकार और उजालों की तुलना का उगम,
इसी से होती हैं मन में विचारो की उत्पत्ति,
इसी से बंधते है होने और ना होने के कयास,
संभव और असंभव के इस चक्रकाल में
धसते जाते हैं कई सत्य - असत्य के आयाम,
प्रकाश की अनुपस्थिति जन्म देती है अंधकार को,
और अंधकार का नहीं होता कोई अस्तित्व,
सत्य - असत्य, पाप - पुण्य, अच्छा - बुरा, दानव - मानव,
सब एक दूसरे पर निर्भर, निरंतर, नितांत ।
विरूद्ध ही प्रमाण है समानता का ..!

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