याद तो याद है भुलाता कैसे
उनसे यु नजरे चुराता कैसे,
वो मेरे बारे मे सोचे तो कुछ हो
मै उसे उम्रभर सोचता कैसे,
जिनको छुना भी मुझे मुनासिब न था
उनको खयालोमेभी चुमता कैसे,
वो मेरे यार से लगते है लेकिन
मै उन्हे अपना बनाता कैसे,
जलने के बाद भी जलती रही दुनिया
मै जलनेवालो को बुझाता कैसे,
चलना तो वक्त के साथ है युही
मै वहा अकेला रुकता कैसे,
चारसू उनकिही खुशबू है "यकीन"
मै उन्हे हर तरफ़ खोजता कैसे....
याद तो याद है भुलाता कैसे
उनसे यु नजरे चुराता कैसे,
2 comments:
एक नौजवान कि नब्ज आप अच्छीतरह से पहचानने लगे है, आपकी यह रचनाए हमें स्वर्गीय मजरूह सुल्तानपुरी कि याद दिलाती हैं जिसमे उन्होने युवा प्रेमी की भावनाओंकॊं कागज पर उतारा था.ऐसीही सुंदर रचनाएं आप बनाते जाइए.
Your poems Writing skills are impeccable... Unmatchable...and I like most the way you choose the words...
These words shows all the emotions which most of the youth think their own feelings..........
Carry on Writing......Best wishes..........
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