Wednesday, April 4, 2018

प्यार क्या हैं?

प्यार! 
एक ऐसी पहेली है, जो सदियों से लोगों के दिलो-दिमाग पर राज कर रही हैं. क्या कोई जानता भी है के 'प्यार किसे कहते हैं'? ऐसा क्या हो जाता है जब हमें लगता हैं के हां हमें प्यार हैं. एक दूसरे के ख़यालों मे दिन रात डूबे रहना प्यार है? किसी अज़ीज के ख्व़ाब पूरे करने के लिए निस्वार्थ जीवन समर्पित कर देना प्यार हैं? प्यार त्याग है या भोग है? प्यार मोह है या चाह? प्यार प्यास है या तृप्ति? 
यक़िन मानिए प्यार किसी एक बात या विचार से समझाने वाली चीज नहीं है. ये वो एहसास है जो अगर एक बार हो जाए तो जन्म-जन्मांतर तक इसकी अनगिनत स्मृतियां हमारे तन मन को प्रसन्न एवम् सुगंधित रखती है. प्यार एक ऐसी छुअन है जो हमारे पाँचों इंद्रियों से नहीं बल्कि आत्मा से अवगत होती हैं. हम जिसे प्यार करते हैं या जिससे स्नेह हो जाता है, ऐसे व्यक्ति का स्थान हमारे जीवन में सदा के लिए उच्च हो जाता हैं और इस बात का हमें ना गर्व होता हैं ना अभिमान. प्यार ऐसे कई अनामिक धागों से बुना हुआ एक रेशम का कालिन है जो समय आने पर हमें कांटों से बचाने के लिए हमारे पाँँव के निचे समर्पित हो जाता हैं, तो कभी हमारा सम्मान बनकर हमारे सर का ताज बन जाता हैं. कभी हमें अपने अस्तित्व का एहसास दिलाता हैं तो कभी अहम से हम बना देता हैं. हम प्यार को किसी एक परिभाषा में नहीं बाँँध सकते, इसीलिए कई विशेषणों का आधार लेकर इसको समझने का प्रयास करते हैं. फिर वही प्रश्न बार बार सामने आता है कि क्या प्यार को किसी भी माध्यम से समझा जा सकता हैं? तो उत्तर मिलता है, नहीं. प्यार को किसी में देखा जा सकता है, किसी द्वारा सुना जा सकता हैं पर समझा नहीं जा सकता क्योंकि इसको समझने के लिए इसकी गहराई में ऊतर कर ऊँचाई तक पहुँचना पडता है. ऐसी कौनसी चीज है जो हमें प्यार से रूबरू कराती हैं? एक बात ये है के हम दो होकर एक से हो जाते हैं. हमारा सुख-दुख, लाभ-हानी,
मिलन-जुदाई, इन सबसे आगे निकल जाते हैं. प्यार हमें हर उस चीज से मुक्ति दिलाता हैं जो बंधन हो. प्यार हमें किसी का गुलाम नहीं बनाता बल्कि हमें अपना ही स्वामी बनने कि क्षमता हमें प्यार देता हैं. विचारोंसे मुक्त होकर जब आपका अन्तरमन प्रसन्नता की लहरो पर विहार करता हैं वो प्यार है. प्यार संशय नहीं बल्कि दृढ़ विश्वास है. प्यार मालकियत नहीं स्वतंत्रता हैं. जब हम किसी व्यक्ति में प्यार खोजने की चेष्टा करते है तो केवल असफलता और निराशाही हाथ लगती हैं क्योंकि प्यार की खोजही प्यार की सबसे बडी विडंबना है. प्यार खोने जैसी चीज नहीं है ना ही पाने जैसी. अंधकार में बावजूद रौशनी की तरह होता है प्यार. एक रौशनी जो तन मन उजागर कर दे. दोस्तों प्यार पर किसी का काबू नहीं होता इसे गौर से समझा जाता है. ये एक ऐसी अनुभूति है जिसका एहसास हमें हर सोच हर विचार से मुक्त कर देता है और सिर्फ प्यार की तरंगें ही हमारे संपूर्ण शरीर दर- भीतर लहराती रेहती हैं. क्या आपको कभी प्यार में धोखा हुआ हैं? क्या आपको कभी प्यार में दर्द मिला हैं? क्या आपको कभी किसी की जुदाई में तकलीफ का सामना करना पडा हैं? तो यकिन मानिए ये प्यार नहीं बल्कि कुछ और हैं. ये केवल मात्र आकर्षण हो सकता हैं या फिर किसी से कुछ पाने की अपेक्षा. और जहां कुछ मिलने की या पाने की अपेक्षा हो वो प्यार नहीं कुछ और हैं. प्यार में ना कुछ पाना होता हैं ना कुछ खोना. प्यार में तो बस हम यात्री हैं जो हमें अपने आप स्वयंपूर्ण, परिपूर्ण होने का एहसास दिलाता हैं. कुछ मिल जाये तो समझो प्यार नहीं, कुछ खो जाये तो समझो प्यार नहीं. प्यार का संबंध ना मिलन से हैं ना जुदाई से, ना जीवन से है ना मृत्यु से. प्यार इन सब से बढकर हैं. आपकी चेतना को जो छू जाये, आपके विचार गमन मे जो प्रवाहित हो वो प्यार हैं. सांस की हर लहर को जिस से एक लयबद्धता प्राप्त हो वो प्यार हैं. सांस एक पल के लिए थम जाए और हमें अद्भुत अद्वितीय क्षण की अनुभूति प्यार हैं. हर पल किसी का इंतजार प्यार नहीं बल्कि किसी के हमारे आसपास ना होना भी प्यार हैं. किसी हमसफर के साथ जिंदगी भर साथ निभाने के सपनों में खो जाना प्यार नहीं हैं बल्कि ऐसे व्यक्ति का एहसास हमें मिला इस सदविचार में प्रसन्नता से जीवन का व्यतीत हो जाना प्यार हैं. प्यार मुक्ति है, निश्चिंतता हैं, जीवन के आसमाँँ में निडर होकर गोता लगानाही प्यार हैं. प्यार में किसी प्रकार का करार या कटिबद्धता नहीं होती, प्यार संसार के हर बंधन से मुक्त होता है और मुक्त कर देता है. 
प्यार किया नहीं जाता प्यार को जिया जाता है.