हर विपदा का एक ही हल, हो मन में आशाभाव,
फिर ना कोई छू पाएगा तुमको दुर्बल भाव।
अनित्य हर पल, अनित्य हलचल, अनित्य है संसार
देख निरंतर नहीं ठहरती एक किनारे नाव ।
चलते रहना इस सृष्टि का हैं यही तो एक स्वभाव
हर विपदा का एक ही हल, हो मन में आशाभाव,
अतीत में झाकों तो जानो है अनुभव अपरंपार
एक बात तो समझ ही आए ना धूप रही ना छाव।
फिर क्यों सोचे आगे क्या हो चल शक्तिरूप समान
हर विपदा का एक ही हल, हो मन में आशाभाव।
अपने मन में बात पक्की जो सबके हित की ठानी हो,
अपना कोई ना स्वार्थ रखो तो रहेगा सबसे लगाव।
स्वहित में ही सबका हित है यही हो अपना पुराने
हर विपदा का एक ही हल, हो मन में आशाभाव
फिर ना कोई छू पाएगा तुमको दुर्बल भाव
बस मन में आशाभाव, हो मन में आशाभाव ।
फिर ना कोई छू पाएगा तुमको दुर्बल भाव।
अनित्य हर पल, अनित्य हलचल, अनित्य है संसार
देख निरंतर नहीं ठहरती एक किनारे नाव ।
चलते रहना इस सृष्टि का हैं यही तो एक स्वभाव
हर विपदा का एक ही हल, हो मन में आशाभाव,
अतीत में झाकों तो जानो है अनुभव अपरंपार
एक बात तो समझ ही आए ना धूप रही ना छाव।
फिर क्यों सोचे आगे क्या हो चल शक्तिरूप समान
हर विपदा का एक ही हल, हो मन में आशाभाव।
अपने मन में बात पक्की जो सबके हित की ठानी हो,
अपना कोई ना स्वार्थ रखो तो रहेगा सबसे लगाव।
स्वहित में ही सबका हित है यही हो अपना पुराने
हर विपदा का एक ही हल, हो मन में आशाभाव
फिर ना कोई छू पाएगा तुमको दुर्बल भाव
बस मन में आशाभाव, हो मन में आशाभाव ।
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