बिजली जैसे तार बदन में जब दौड़े
सांस रुक - रुक चले फिर भी ना संभले,
रोम रोम में ऊर्जा पूरी समाजाएं
सृष्टि से हम एक रूप जब हो जाएं,
किसी बात का कोई हमको एहसास ना हो
ऐसे जानो जैसे कोई पास ना हो,
सब कुछ कर जाने को तब जी चाहता हो
दुनिया पर, मर मिट जाने को जी चाहता हो,
इसी बात को एहसास ख़ुशी का कहते हैं
जो खुश होते है, इसी हाल में रहते हैं।
सांस रुक - रुक चले फिर भी ना संभले,
रोम रोम में ऊर्जा पूरी समाजाएं
सृष्टि से हम एक रूप जब हो जाएं,
किसी बात का कोई हमको एहसास ना हो
ऐसे जानो जैसे कोई पास ना हो,
सब कुछ कर जाने को तब जी चाहता हो
दुनिया पर, मर मिट जाने को जी चाहता हो,
इसी बात को एहसास ख़ुशी का कहते हैं
जो खुश होते है, इसी हाल में रहते हैं।
No comments:
Post a Comment