संयम एक आभास है शायद ,
स्वभाव के विपरीत
जो सभी नियम बनाएं गए,
उनमें से एक संयम भी लगता हैं।
कुछ ना करने के निष्क्रिय भाव को
बहुत कुछ करने का लक्षण माना गया।
किसी कृति का ना होना कैसे वास्तव मान लें,
कैसे समझा जाएं के संयम एक सत्य हैं।
जो सिर्फ और सिर्फ विचारों में हो
उसे दर्शाएं कैसे, माने कैसे, समझे कैसे?
इसका तो कोई तटस्थ और स्वतंत्र रूप हैं ही नहीं।
संयम एक आभास है शायद...!
स्वभाव के विपरीत
जो सभी नियम बनाएं गए,
उनमें से एक संयम भी लगता हैं।
कुछ ना करने के निष्क्रिय भाव को
बहुत कुछ करने का लक्षण माना गया।
किसी कृति का ना होना कैसे वास्तव मान लें,
कैसे समझा जाएं के संयम एक सत्य हैं।
जो सिर्फ और सिर्फ विचारों में हो
उसे दर्शाएं कैसे, माने कैसे, समझे कैसे?
इसका तो कोई तटस्थ और स्वतंत्र रूप हैं ही नहीं।
संयम एक आभास है शायद...!
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